TicketCreator 5.13
तुमने पहली बार कहा— "तेरी आँखें गहरे पानी के कुएँ हैं।"
और मैं उसी पल उस कुएँ में गिर गया। कोई रस्सी नहीं थी, कोई दीवार नहीं। बस अंधेरा था—मीठा, नम, और अंतहीन। नीचे गिरते हुए मैंने सोचा, यह उपमान तो खतरनाक है। तुमने मेरी आँखों को 'कुआँ' कहकर मुझे ही उनमें डुबो दिया। falling into your simile in hindi
गिरना सीख लिया है मैंने। गिरकर भी न उठने की कला। क्योंकि तुम्हारे हर उपमान में एक नया क्षितिज है, एक नई तह। और मैं अब उस तह में घर कर गया हूँ। falling into your simile in hindi
और मैं उस हवाई जंगल में जा गिरा। जहाँ नीचे ऊपर है, और ऊपर नीचे। वहाँ मैंने सीखा—गिरना भी एक दिशा है। बस तुम्हारे उपमान की गुरुत्वाकर्षण शक्ति चाहिए। falling into your simile in hindi
तीसरी बार तुम चुप थीं। लेकिन तुम्हारी चुप्पी ने कहा— "हम दो ऐसे पेड़ हैं, जिनकी जड़ें ज़मीन से बाहर बढ़ रही हैं।"
पहले मैं सीधी-सादी ज़मीन पर चलता था। बातें सपाट थीं, मौसम पूर्वानुमानित थे। दर्द को 'दर्द' कहता था, खुशी को 'खुशी'। मैं प्रतीकों का भूखा नहीं था, और न ही रूपकों का बोझिल कारवाँ।
अब मैं प्रतिदिन गिरता हूँ। तुम कहती हो 'चाँद'—मैं उस चाँद की दरारों में समा जाता हूँ। तुम कहती हो 'धूल'—मैं उड़कर तुम्हारी पलकों पर बैठ जाता हूँ। तुम कहती हो 'आग'—मैं जलता नहीं, बल्कि ईंधन बनकर तुम्हारे भीतर की लौ को बताता हूँ कि शीतल भी कैसे दहक सकता है।